विभिन्न ग्रहों से द्वितीयेश की युति

विभिन्न ग्रहों से द्वितीयेश की युति

विभिन्न ग्रहों से युति, दृष्टि या अन्य विध द्वितीयेश का सम्बन्ध प्रतिफलों को विशेष परिवर्तन कर प्रभावित करता है । अतः यह आवश्यक है कि  कुंडली विश्लेषण करते समय इन पर ध्यान दिया जाये । 

* यदि द्वितीयेश बृहस्पति युक्त स्व राशि अथवा केंद्र गत हो तो जातक धन एवं भौतिक सुख प्राप्त करता है । 

*  यदि द्वितीयेश शुक्र  व् लग्नेश युत हो तो जातक  दृष्टिहीन अथवा अंगहीन होगा । 

* यदि द्वितीयेश द्वादशेश युत त्रिक स्थान अर्थात षष्ट, अष्टम या द्वादश स्थानगत हो तो भी उप्रोक्तसम परिणाम होंगे । 

* यदि चन्द्र पापग्रह युत हो या शुक्र यदि द्वतीय स्थानगत हो तो जातक नेत्रहीन होगा ।

* यदि चन्द्र शुक्र युत  लग्न से षष्ट, अष्टम या द्वादश स्थान में हो तो जातक रतोंधी से पीड़ित होगा । 

* यदि सूर्य शुक्र व् लग्नेश युत लग्न से षष्ट, अष्टम, द्वादश स्थान में  हो तो जातक जन्मांध होगा । 

* इसी प्रकार यदि पिता, माता, भाई व् पत्नी की दृष्टिहीनता का ज्ञान करना हो तो हमें निरिक्षण करना चाहिए कि क्या नवमेश, चतुर्थेश, तृतीयेश, व् सप्तमेश सूर्य व् शुक्र से युक्त लग्न से षष्ट, अष्टम, या द्वादश स्थान में स्थित हैं ? यदि ऐसा है तो उस स्थान विशेष से सम्बंधित परिजन क्रमशः दृष्टिहीन होंगे । 

* यदि द्वतीय स्थान पर शनि लग्नेश या शुभ गृह की दृष्टि हो तो जातक की दीर्घायु निश्चित है । 

* यदि द्वितीयेश नीचगत, सूर्यतप्त, प्रछन्न या गृह युद्ध में पराजित हो तो जातक निजोपर्जित धन अर्थात अपनी कमाई का उपभोग नहीं कर पाएगा । 

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